कन्याओं का सच्चा पूजन उन्हें स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना : डॉ. रचना गुप्ता

कन्याओं का सच्चा पूजन उन्हें स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना : डॉ. रचना गुप्ता

अर्की के सीबीएसई सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 150 छात्राओं को विशेषज्ञों ने दिए मासिक धर्म स्वच्छता और किशोर स्वास्थ्य के टिप्स

छात्राओं ने महिला चिकित्सकों से खुलकर पूछे सवाल, माहवारी से जुड़ी भ्रांतियां कीं दूर

बाघल टाइम्स

अर्की (सोलन) नवरात्रों में कन्याओं का सच्चा पूजन केवल परंपरागत पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ, शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना है। बेटियों को उनके स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी देना, उनकी झिझक दूर करना और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना ही कन्या सम्मान का वास्तविक स्वरूप है। यह बात हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूर्व वरिष्ठ सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रचना गुप्ता ने अर्की के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जो अब सीबीएसई से संबद्ध हो चुका है, में छात्राओं के लिए आयोजित व्यक्तिगत स्वच्छता एवं मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कही।

 

कार्यक्रम में शिमला के प्रतिष्ठित राज्यस्तरीय अस्पतालों से आए चिकित्सा विशेषज्ञों ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और हार्मोनल बदलावों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मासिक धर्म प्रबंधन, पोषण, टीकाकरण तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी दी। विशेष रूप से 12 से 15 वर्ष की आयु में छात्राओं को होने वाली शारीरिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं, मासिक धर्म के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में करीब 150 छात्राओं ने भाग लिया।

 

डॉ. रचना गुप्ता ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के शरीर की एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। इसे लेकर किसी तरह की शर्म, संकोच या हीनभावना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया बेटियों के बुलंद हौसलों, उनकी प्रतिभा और करियर की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। उचित स्वास्थ्य जानकारी, स्वच्छता और आत्मविश्वास के साथ बेटियां जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।

 

उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए प्रशासनिक सेवाओं, सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बलों, चिकित्सा, विज्ञान, पत्रकारिता और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अनेक अवसर उपलब्ध हैं। मासिक धर्म को अपनी क्षमताओं की सीमा मानने के बजाय छात्राओं को इसके उचित प्रबंधन और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी रखनी चाहिए। विभिन्न सेवाओं में निर्धारित शारीरिक एवं चिकित्सकीय पात्रता मानदंडों को पूरा करते हुए बेटियां अपनी पसंद का करियर चुन सकती हैं और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

 

डॉ. गुप्ता ने छात्राओं को आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई बीच में न छोड़ने का संदेश भी दिया। उन्होंने भारत सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि पात्र छात्राएं अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों के सहयोग से इन योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने स्कूल प्रबंधन से भी आग्रह किया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मेधावी छात्राओं तक छात्रवृत्ति संबंधी जानकारी पहुंचाई जाए।

 

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि छात्राओं ने महिला चिकित्सकों और मुख्य अतिथि के समक्ष बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं रखीं। मासिक धर्म, व्यक्तिगत स्वच्छता, शारीरिक बदलाव और किशोरावस्था से जुड़ी अनेक भ्रांतियों को लेकर छात्राओं ने सवाल पूछे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर उनकी शंकाओं का समाधान किया और आवश्यक स्वास्थ्य सावधानियों की जानकारी दी।

 

इस अवसर पर शिमला की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. कनिका, खंड चिकित्सा अधिकारी अर्की डॉ. मुक्ता रस्तोगी, जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रिंका सूर्यवंशी तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य रंजीश राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे। विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया और किशोर स्वास्थ्य एवं मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

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