पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में गूंजे मेडिकल बिल और वित्तीय लाभ देनदारी के मुद्दे!
बाघल टाइम्स
कुनिहार ब्यूरो( 07जून) पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन कुनिहार की मासिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्ण लाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा पेंशनरों की लंबित मांगों और देनदारियों के निस्तारण में हो रही देरी पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। कृष्ण लाल ने कहा कि लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद पेंशनरों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
बैठक में विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए सरकार से मांग की गई कि महंगाई भत्ते की सभी लंबित किस्तों का भुगतान बिना किसी देरी के किया जाए। सदस्यों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशनरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि उनकी वैध देनदारियां लंबे समय से लंबित पड़ी हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की कॉम्यूटेशन राशि की कटौती अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष 8 माह किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। बैठक में कहा गया कि कई राज्यों में इस संबंध में आदेश लागू किए जा चुके हैं। लेकिन हिमाचल में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पेंशनरों ने सरकार से मांग की कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कटौती की गई राशि को मूल पेंशन में तुरंत समायोजित किया जाए।
बैठक में 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पेंशनरों को 5 प्रतिशत 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ मूल पेंशन में जोड़ने की मांग भी रखी गई। उन्होंने ने कहा कि बुजुर्ग पेंशनरों की बढ़ती जरूरतों और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को देखते हुए यह राहत अत्यंत आवश्यक है।
एसोसिएशन ने एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ तुरंत जारी करने की मांग की। साथ ही पेंशनर्स की जेसीसी की बैठक शीघ्र बुलाने और लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति तथा मेडिकल बिलों का भुगतान तुरंत करने की मांग भी दोहराई गई।
बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्ण लाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पहली ऐसी सरकार है जिसने पेंशनरों को भी सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बुजुर्गों को घर पर आराम करना चाहिए। उस उम्र में उन्हें धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करनी पड़ रही है।
उन्होंने ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते पेंशनरों की लंबित मांगों और भुगतानों का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जिसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
वहीं बैठक में चेतराम भार्गव, ज्ञान जोशी, सूर्यकांत जोशी, श्यामलाल परिहार, वीरेंद्र सिंह वर्मा व राजेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।