
14 April 2021
बाघल टाइम्स
(ऐ के गुप्ता दाड़लाघाट)

हिमाचल जिसे देवभूमि भी कहते है यहां अनेक प्रकार के पेड़ पौधों से सुसज्जित पहाड़ियों पर देवताओं द्वारा जीवनदायिनी अमृततुल्य जड़ी बूटियों की सौगात दी गई है जिन्हें पहचान कर हम अपने जीवन को स्वस्थ रखकर साकार कर सकते हैं।वहीं हमारे क्षेत्र व आसपास की प्रकृति में कई पेड़ पौधे व जड़ी बूटियां हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर हैं,इन्हीं में से एक कचनार जिसे बाघल्याणि भाषा मे करयाली कहा जाता है,यह करयाली का पेड़ जो हर तरह से लाभदायक है।मार्च के बाद जैसे जैसे गर्मी अपना रंग दिखाना शुरू करती है,फूलों से लदने वाले इस पेड़ की पत्तियां,तना व फूल, कलियां आदि सभी उपयोगी होती हैं।अर्की तहसील व जिला सोलन सहित साथ लगते जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में भी आजकल कचनार के पेड़ फूलों और कलियों से लदे हैं।कचनार की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं।इनमें से गुलाबी कचनार का सबसे ज्यादा महत्व है।कचनार के फूलों की कली लंबी,हरी व गुलाबी रंग की होती है।बुजुर्गों और शोधकर्ताओं की मानें तो कचनार के फूल और कलियां वातरोग,जोड़ों के दर्द के लिए विशेष लाभकारी होती हैं।इसकी कलियों की सब्जी व फूलों का रायता बड़े ही चाव से खाया जाता है।कचनार की कलियों और फूलों की सब्जी के साथ ही रायता पकौड़े ओर अचार भी बनाया जाता है,जिससे रक्त पित्त,फोड़े,फुंसियों को शांत करती है।वहीं भरी गर्मी के मौसम में जहां कुछ खाने पीने का मन नही करता वहीं इस गुणो की खान करयाली से हाजमा तन्दरुस्त व भूख बढ़ती है व सेहत भी तन्दरुस्त होती है।
