
बाघल टाइम्स नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक के लाखों छात्र दो साल बाद वार्षिक परीक्षाएं ऑफलाइन देंगे। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 और 21 में इन कक्षाओं के छात्रों की न तो कक्षाएं और न ही ऑफलाइन परीक्षाएं हो पाई थीं। इसके चलते मूल्यांकन प्रक्रिया और ऑनलाइन परीक्षाओं के माध्यम से छात्रों को प्रोमोट किया गया था। आरटीई एक्ट के तहत भी प्रदेश में आठवीं तक के हर कक्षा के छात्र को फेल न करने और अंकों के आधार पर ग्रेड देने की व्यवस्था की गई थी। अब तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों में कमी आने के बाद प्रदेश के ग्र्रीष्मकालीन स्कूलों में आठवीं तक की कक्षाओं की परीक्षाएं ली जा रही हैं।
तीसरी, पांचवीं, आठवीं, नौवीं और जमा एक कक्षा की वार्षिक ऑफलाइन परीक्षाओं के लिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने टेंटेटिव डेटशीट भी जारी कर दी है। नौ मार्च से यह परीक्षाएं ली जाएंगी। कोरोना संक्रमण की वजह से चरमराई शिक्षा व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव छोटी कक्षाओं के छात्रों पर पड़ा है।
दो वर्ष के भीतर हालांकि आठवीं से जमा दो कक्षाओं के बच्चों को बीच में स्कूल बुलाया गया। पर आठवीं से निचली कक्षाओं के छात्र दो साल में केवल कुछ गिने-चुने दिन स्कूल जा पाए। वहीं दो वर्ष के भीतर इन छोटी कक्षाओं की ऑफलाइन परीक्षाएं भी नहीं हो पाईं। पहले लॉकडॉउन 2020 में तीसरी कक्षा में पढऩे वाला छात्र अब पांचवीं कक्षा की परीक्षाएं देगा।

हालांकि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाओं और हर घर पाठशाला के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही थी।
